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Saturday, May 20, 2023

कांग्रेस की 'रेवड़ी' राजनीति कर्नाटक में युवाओं के भविष्य को बर्बाद कर सकती है : केंद्रीय मंत्री राजीव चंद्रशेखर

अगले साल होने वाले आम चुनाव परिणाम को लेकर केंद्रीय मंत्री राजीव चंद्रशेखर ने एक बड़ा बयान दिया है. उन्होंने शुक्रवार को कहा कि कर्नाटक विधानसभा चुनाव में भले ही कांग्रेस को जीत मिली हो लेकिन अगले साल होने वाले आम चुनाव में देश की जनता एक बार फिर पीएम मोदी को ही जीताने वाली है. इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी, कौशल विकास और उद्यमिता राज्य मंत्री राजीव चंद्रशेखर ने एक साक्षात्कार में कहा कि कन्नडिगों की भावी पीढ़ियों को कांग्रेस जो रेवड़ियां बांटने जा रहा ही है, उसका भुगतान आने वाली पीढ़ियों को ही करना होगा. बता दें कि कर्नाटक विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने राज्य की जनता को 200 यूनिट फ्री बिजली, महिलाओं और बेरोजगार युवाओं को हर महीने इनकम सपोर्ट देने जैसे वादे किए हैं. 

केंद्रीय मंत्री ने द केरल स्टोरी फिल्म को लेकर हो रहे विवाद को लेकर भी बात की. उन्होंने कहा कि फिल्म एक सच्ची कहानी पर आधारी है. जिसे हर किसी को जानने का अधिकार है.  आम जनता का यह जानना भी जरूरी है कि आखिर राष्ट्र की एकता किस से खतरा है.

कर्नाटक की हार से भाजपा की प्रमुख सीख क्या रही है, खासकर जब कई शीर्ष मंत्री और नेता हार गए हैं?

इस पर कुछ कहना जल्दबाजी होगी. राज्य और केंद्र दोनों में हमारा पार्टी नेतृत्व इस बात पर गौर करेगा कि हार की कौन सी वजहें थीं साथ ही क्या कारण थे और क्या बदलाव किए जाने की जरूरत है. हमारे मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई पहले ही इसके बारे में बोल चुके हैं. इसलिए हम भी विश्लेषण करेंगे. हम आत्मनिरीक्षण भी करेंगे और देखेंगे कि क्या गलत और क्या सही हुआ.

क्या आपको लगता है कि कांग्रेस की गारंटियों का कर्नाटक के वित्तीय स्थिति पर प्रभाव पड़ेगा?

कांग्रेस जिस तरह के "रेवड़ी" अर्थशास्त्र का प्रचार कर रही है, वह निश्चित रूप से राज्य के वित्तीय स्वास्थ्य को प्रभावित करेगा. खासकर, जिस तरह से सीएम बसवराज बोम्मई और बीजेपी ने कोविड-19 की मार के बाद राज्य की अर्थव्यवस्था को फिर से खड़ा किया. शुरुआती अनुमान है कि कांग्रेस की 'रेवड़ी' राजनीति से हर वर्ष 60,000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त खर्च होगा, जिसका मतलब है कि अनिवार्य रूप से राज्य का राजकोषीय घाटा प्रभावित होगा. और कन्नडिगों की भावी पीढ़ियों को इसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा. जिसका अर्थ है कि राज्य का राजकोषीय घाटा प्रभावित होगा, और कन्नडिगों की भावी पीढ़ियों को आज की कांग्रेस सरकार द्वारा उधार लिए गए कर्ज का खामियाजा उठाना पड़ेगा.मुझे लगता है कि यह एक राज्य और उसके भविष्य के लिए अच्छा नहीं है, खासकर युवाओं के लिए जिन्हें कर्ज का बोझ उठाना पड़ेगा. देखते हैं सरकार अपने वादों को कितना पूरा कर पाती है और कितना नहीं. कांग्रेस का ट्रैक रिकॉर्ड यह रहा है कि वह बहुत सारे वादे करती है और उसे पूरा करने में विफल रहती है.

कर्नाटक के दूसरे इलाकों की तुलना में बेंगलुरू में बीजेपी को ज्यादा सीटें मिली. बेंगलुरू से होने के नाते आपकी क्या अपेक्षाएं हैं ?

मुझे लगता है कि बेंगलुरू ने इस बार निर्णायक बहुमत को लेकर बहुत महत्वपूर्ण प्रतिक्रिया दी है. दुर्भाग्य से, यह राज्य के बाकी हिस्सों के लिए कारगर नहीं रहा. लेकिन मैं बहुत खुश हूं, और गर्व है कि बेंगलुरू के लोगों ने देखा है कि भाजपा के राज में भविष्य सबसे अच्छा है. बेंगलुरू न केवल कर्नाटक का बल्कि भारत के लिए भी बहुत महत्वपूर्ण हिस्सा है. खासकर तब जब पीएम मोदी के नेतृत्व में नया भारत आकार ले रहा है. और इसलिए यह महत्वपूर्ण है कि बेंगलुरू को शहरी अराजकता और उस शोषण से बाहर निकलना चाहिए जिसे लोगों ने दशकों से देखा है. इसे आधुनिक शासन की ओर बढ़ना चाहिए और इसके सभी नागरिकों के लिए जीवन को आसान बनाने की उम्मीद है. लेकिन मुझे यकीन नहीं है कि यह सरकार उस पर खरा उतरने में सक्षम भी होगी या नहीं, क्योंकि कर्नाटक में शासन करने वाली कांग्रेस पार्टी का बीते कई सालों का  ट्रैक रिकॉर्ड यह रहा है कि इस पार्टी ने हमेशा बेंगलुरू को शोषण के अवसर के रूप में देखा है. इसलिए मैं ये नहीं मान पा रहा हूं कांग्रेस बेंगलुरू के लिए कुछ भी ठोस तौर पर करने में सक्षम होगी, लेकिन मैं वास्तव में उम्मीद कर रहा हूं कि हम निकट भविष्य में शहर के लिए कुछ करने में सक्षम होंगे. 

क्या आपको लगता है कि कर्नाटक के शीर्ष कांग्रेस नेताओं के बीच पिछले कुछ दिनों से दिख रही असहमति, राज्य के शासन को प्रभावित कर सकती है?

देखिए, मैं इन सज्जनों (सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार) को वास्तव में अच्छी तरह से जानता हूं, और प्रचार के दौरान भी, मैंने उन्हें आज कर्नाटक की राजनीति में जो कुछ भी गलत है, उसके पोस्टरबॉय के रूप में संदर्भित किया है. ये दोनों ही दो अलग-अलग तरह की राजनीति को दर्शाते हैं, जिससे हम पहले ही दूर हो चुके हैं. लेकिन ये दोनों ही एक सिक्के के दो पहलू हैं. मैं आपको बता दूं कि जहां बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार है, सार्वजनिक धन और सार्वजनिक संसाधनों का जबरदस्त शोषण है, और चाहे वह खनन हो या अनुबंध, वहां पर इन दोनों नेताओं का एक शानदार ट्रैक रिकॉर्ड है. इनमें से एक समाजवादी भी शामिल हैं, पर वह 70 लाख रुपये की हब्लोट घड़ी पहनते हैं. मुझे नहीं लगता कि कांग्रेस के शासन में कुछ नया होगा, और यह सामान्य से ज्यादा ही है. हाल ही में एक मीम भी आया था जिसमें कहा गया था कि सिद्धारमैया सुबह 6 बजे से शाम 6 बजे तक और डीके शिवकुमार शाम 6 बजे से सुबह 6 बजे तक एटीएम चलाएंगे. इसलिए मुझे नहीं पता कि वे कब काम कर रहे हैं और लूट का क्या बंटवारा होगा. लेकिन यह राज्य के लिए अच्छा नहीं है. 

सिद्धारमैया की शपथ ग्रहण समारोह में विपक्षी दलों के कई बड़े नेता एक मंच पर दिखने वाले हैं. क्या इसका 2024 के लोकसभा चुनाव के परिणामों पर कोई असर पड़ेगा और क्या यह एकजुट विपक्ष बनाने के प्रयासों को गति देगा?

बिल्कुल भी नहीं. मुझे इसमें जरा सा भी विश्वास नहीं है. मुझे लगता है कि पिछले नौ वर्षों में भारत की प्रगति को देखने वाले किसी भी समझदार इंसान को इस बात पर कोई संदेह नहीं होगा कि देश किस रास्ते जाना चाहता है और देश के लोग किस रास्ते पर जाना चाहते हैं.  हम दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की राह पर हैं, हम धर्म या किसी अन्य कारणों की परवाह किए बिना सभी के लिए अवसर पैदा कर रहे हैं. और हम उस रास्ते पर चल पड़े हैं, और लोग यही चाहते हैं. हम उम्मीद कर सकते हैं कि कांग्रेस और विपक्षी नेताओं का यह समूह और गंदगी फैलाएंगे, अधिक झूठ फैलाएंगे और 2024 तक आने वाली नौकरियों को भी नुकसान पहुंचाएंगे. लेकिन भारतीयों को लेकर ट्रेन पहले ही स्टेशन छोड़ चुकी है और वे पिछले नौ वर्षों में की गई प्रगति को जारी रखने के लिए दृढ़ संकल्पित हैं. कोई भी पीछे मुड़कर नहीं देखना चाहता है, और ना ही कांग्रेस के पुराने 65 वर्षों के बुरे दिनों में वापस जाना चाहता है. निश्चित रूप से वे कांग्रेस के रेवड़ी अर्थशास्त्र को नहीं चाहते हैं, जो देश को दिवालिया कर सकता है और आने वाली पीढ़ियों को कमजोर भी.

उन्होंने कहा कि पीएम देश को आगे ले जा रहे हैं जहां भारतीयों की नई पीढ़ी अपनी मेहनत और उद्यम क्षमता से अपना सिर ऊंचा कर सकें. मोदी सरकार बगैर किसी बाधा के लगातार सफलताएं हासिल कर रही है. और सरकार को अपने नागरिकों की सफलताओं का शोषण करने के बजाय उनका आनंद लेना चाहिए. इसलिए, 2024 एक पूर्व निर्धारित निष्कर्ष है कि पीएम मोदी शासन करना जारी रखेंगे और देश को उस ओर ले जाएंगे जहां इसे जाना चाहिए. देश के नागरिकों को यह स्पष्ट है कि कर्नाटक में 2023 में जो हुआ इसका असर 2024 के भारत पर नहीं पड़ेगा. यदि आपको याद हो तो वही नेता 2018 में जद (एस) के एचडी कुमारस्वामी के शपथ ग्रहण समारोह में 2018 में एक साथ आए थे, लेकिन 2019 में जो हुआ वह सभी ने देखा. भारत में विपक्ष राजनीतिक पर्यटन और झूठ फैलाने तक सिमट कर रह गया है.

फिल्म द केरला स्टोरी को लेकर विवाद, कुछ राज्यों द्वारा इस पर प्रतिबंध और बाद में सर्वोच्च न्यायालय द्वारा प्रतिबंध पर रोक लगाने के फैसले ने रचनात्मकता और सेंसरशिप पर नई बहस छेड़ दी है. उस पर आपकी क्या टिप्पणियां हैं?

मुझे लगता है कि यह बहुत ही अजीब तरीका है. यह टीएमसी, कांग्रेस और अन्य लोगों की ओर से राजनीतिक आवेग है जहां वे अपने स्वयं के वोट बैंक से इतने भयभीत हैं कि जमीन पर सच्चाई की रचनात्मक अभिव्यक्ति को भी नहीं स्वीकार कर पा रहे हैं. उन्हें डर है कि अगर ऐसी फिल्म पर रोक नहीं लगाई गई तो वह अपना वोट बैंक भी ना गंवा दें. जनता की भावना को जानबूझकर आहत करना गलत है. लेकिन सच्चाई को सबके सामने रखना और हर किसी को समझने और सीखने के लिए प्रेरित करना एक अलग बात है. मुझे निश्चित रूप से लगता है कि जो राजनीतिक दल और नेता अपने वोट बैंक के लिए ऐसा करते हैं, वे भारत के ताने-बाने के साथ घोर अन्याय कर रहे हैं, जो अभिव्यक्ति की आज़ादी से जुड़ा है. केरल की कहानी एक ऐसी कहानी है जिसे हर किसी को देखना चाहिए. यह एक वास्तविक समस्या की एक सच्ची कहानी है. यह किसी धर्म के खिलाफ नहीं है और न ही किसी धर्म के समर्थक है. यह एक सामाजिक परिघटना दिखा रहा है जो राष्ट्र की एकता के लिए वर्तमान खतरों को दिखा रहा है. मुझे लगता है कि यह कुछ ऐसा है जिसे देखने का अधिकार सभी को होना चाहिए.
 



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